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Shri Krishna Janamashtami Mahotsav (Gita Vatika) STOCK:OLD STOCK PRICE कविताओं और गीतों का संग्रह

Shri Krishna Janamashtami Mahotsav (Gita Vatika) STOCK:OLD STOCK PRICE कविताओं और गीतों का संग्रह" " , , ,

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Description

कविताओं और गीतों का संग्रह किया गया है

भक्ति और समर्पण के दृष्टिकोण से इन देवियों की लीलाओं

ब्रह्मनिष्ठा और त्याग-वैराग्य के कारण साधु-समाज में उनका बहुत ऊँचा स्थान था। उनके कथन में एक नविन ओज और प्रभाव होता था। वे सदा लक्ष पर दृष्टि रखकर बोलते थे और थोड़े शब्दों में ही बहुत ऊँची बात कह जाते थे। वे यद्यपि कोई वक्ता

एक बार कलकत्ते में उनकी मुलाकात श्रीरामसुखदासजी महाराज से हुई और उनके माध्यम से वह सेठ श्री जयदयाल जी से मिले। उनकी निष्ठा एकमात्र निराकार में थी। जयदयाल जी के परामर्श से बाबा गोरखपुर आकर गीताप्रेस और फिर गीतावाटिका गए। गोरखपुर की गीतावाटिका में हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के साथ स्वामीजी रहा करते थे। स्वामी जी आगे चलकर श्री राधा बाबा के नाम से विख्यात हुए। कहते हैं कि बाबा को अद्वैत तत्व की साधना करते हुए सिद्धि मिली।

उनकी भक्ति और महाभाव की गहराई को उजागर करता है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो अध्यात्मिक मार्ग पर चलना चाहते हैं और श्री कृष्ण एवं राधा के प्रेमपूर्ण संबंधों को समझना चाहते हैं। श्री बालकृष्ण दास जी महाराज की महाभाव में लीन अवस्था को दर्शाते हुए

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